भारत के प्रमुख धार्मिक मन्दिर

केदारनाथ उत्तराखंड 
बद्रीनाथ उत्तराखंड 
द्वारका गुजरात 
जगन्नाथ मंदिर पुरी 
काशी विश्वनाथ मंदिर बनारस 
कामाख्या माता मंदिर असम 
उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर
माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू कश्मीर 

भारत एक प्राचीन मंदिरों का गढ़ रहा हैं। भारत में कही ऐसे प्राचीन और पवित्र मंदिर स्तिथ है। जिसे हमे देखना चाहिएं और भगवान के दर्शन करने चाहिएं। हमारी हिंदू धर्म से जुड़ी कही सारी बाते इन मंदिरों में बताई गईं हैं। जिन्हे हमे जाकर जानना चाहिएं। भारत में हिन्दू मन्दिर कई हजारों वर्षो पुराने हैं। जिनमे से कुछ महत्वपूर्ण मंदिर मैने इस ब्लॉग में साझा किए हैं। इन मंदिरों को दुनियां भर के लोग दर्शन के लिए आते हैं और लाखो लोगो की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 


भारत के प्रमुख धार्मिक मन्दिर में से एक यह भी मन्दिर हैं।यह मन्दिर उत्तराखंड का सबसे बड़ा मन्दिर हैं। यह भगवान शिव का मन्दिर हैं। गिरिराज हिमालय की केदार नामक चोटी पर स्थित है। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग। यहां पर अलकनंदा और मंदाकिनी नदी बहती हैं। यहां हर समय बहुत ठंडी रहती हैं। यह मन्दिर पहाड़ों के बीच आया हुआ हैं। यह एक बहुत ही खुबसूरत भारत का धार्मिक स्थल हैं। यहां पर जानें के लिए ओआपको ट्रेकिंग या फिर चढ़ाई करनी पड़ेगी जो की पथरीले रास्तों के बीच से होकर गुजरना पड़ेगा। यहां पर जानें के लिए आप हेलीकॉप्टर से भी जा सकते हैं। 
 यह मन्दिर गिरिराज की पहाड़ियों और चोटियों में बसा हुआ और बहुत प्रसिद्ध मंदिर हैं। पुरे विश्व भर से यहां पर लोग दर्शन करने आते हैंऔर इन बर्फीली पहाड़ियों का लुफ्त उठाते हैं। वाकई में यह भारत के सर्वोच्च मंदिरों में से एक हैं। इस मन्दिर के कपाट मई महीने में खुलते हैं, तब उतराखंड की यात्रा आरंभ होती है और लाखो श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन करने आते है। मई से लेकर अक्टूबर तक मन्दिर के दर्शन कर सकते हैं। छ महीने मन्दिर बंद रहता है, और छ महीने मन्दिर खुला रहता हैं। 


बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड :-
भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में बद्रीनाथ का मन्दिर स्तिथ हैं। यह मन्दिर अलकनंदा नदी के किनारे पर बसा हुआ हैं। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख मंदिर हैं। यह हिमालय की गोद में बसा हुआ एक खुबसूरत मंदिर हैं। यह मंदिर भगवान विष्णुजी को समर्पित हैं। इस मन्दिर को बद्रीनारायण मन्दिर के नाम से भी जाना जाता हैं। यह मन्दिर भारत के चार धामों में से एक है। बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी को पंचाग गणना के बाद विधि-विधान से तय होता है। आमतौर पर, सर्दियों के आगमन पर मंदिर के दरवाजे अक्टूबर-नवंबर के आसपास बंद कर दिए जाते हैं। 
यह बद्रीनाथ मन्दिर भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक मंदिर हैं। यह बहुत ही खुबसूरत मंदिर हैं। इस मन्दिर के दर्शन करने के बाद मन को एक अलग ही शांति मिलती हैं। बद्रीनाथ मन्दिर दो पर्वत के बीच में बसा हुआ हैं। इन पर्वतों को नर और नारायण कहा जाता है। 


द्वारका गुजरात :- 
यह मन्दिर श्री कृष्ण भगवान का प्राचीन मन्दिर है। गुजरात राज्य के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे स्थित 4 धामों में से 1 धाम हैं। यह समुद्र में डूबी हुई द्वारिका नगरी हैं। द्वारका का यह श्री कृष्णा भगवान का मंदिर लगभग दो हजार वर्ष पुराना मंदिर हैं। इस मन्दिर की आज तक पुरा इतिहास किसी को भी मालूम नही हैं। इतिहासकार बताते हैं की यह नगरी पूरी समुद्र में डूब गईं थीं और आज भी इसके अवसेस मिल जाते हैं।  इतिहासकार बताते है की आज भी डूबी हुई द्वारका नगरी के पत्थर समुद्र में देखें जा चुके हैं। यह एक भारत का प्रमुख धार्मिक मन्दिर हैं। यहां पर दुनियां भर के पर्यटक घूमने आते हैं। यह मन्दिर पुरे साल चालु रहता हैं और श्रदालुओ भीड़ लगी रहती है। 


जगन्नाथ मंदिर पुरी :- 
भारत के प्रमुख धार्मिक मन्दिर में से एक यह भी मन्दिर हैं।जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा राज्य के पुरी शहर के समुद्र तट पर स्तिथ हैं। यह हिंदुओ का प्राचीन और बहुत ही पवित्र मंदिर हैं। यहां हर साल लाखों हिंदू श्रदालु और साधु यहां पर माथा टेकने आते हैं। अपनी मनोकामनाएं मनवाने आते हैं। जगन्नाथ मंदिर विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण भगवान को समर्पित हैं। यह मंदिर उड़िसा की राजधानी भुवनेश्वर से थोड़ी ही दूरी पर स्तिथ हैं। हमारे पुराणों में इस मंदिर को पृथ्वी का वैकुंठ कहा गया हैं। इस मन्दिर का ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता हैं। 
इस मन्दिर की ऊंचाई  215 फुट हैं। यह मन्दिर विश्व भर विख्यात हैं। यहां पर दुनियां भर के हिंदू दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर का रसोई घर दुनियां का सबसे बड़ा रसोई घर हैं। आज तक किसी पक्षी या फिर किसी विमान को मंदिर के उप्पर से उड़ते हुए नही देखा गया। मंदिर का क्षेत्रफल 4 लाख वर्ग फुट में हैं। 


काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी :- 
काशी विश्वनाथ मंदिर यह उत्तरप्रदेश के वाराणसी जिले में स्तिथ हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं। यह भगवान शंकर का सबसे प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। यह मन्दिर पवित्र गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्तिथ हैं। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। 
यह मंदिर बहुत हि खुबसूरत मन्दिर हैं। यहां पर कई लाखो श्रद्धालु यहां आते हैं। यह मंदिर विश्वनाथ या विश्वेश्वर के नाम से भी जाना जाता हैं। ऐसी मान्यता है कि वाराणसी या काशी में मनुष्य के देहावसान पर स्वयं महादेव उसे मुक्तिदायक तारक मंत्र का उपदेश करते हैं। इसीलिए अधिकतर लोग यहां काशी में अपने जीवन का अंतिम वक्त बीताने के लिए आते हैं और मरने तक यहीं रहते हैं।


कामाख्या माता मंदिर असम :- 
अगर आप असम घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आप कामख्या माता मंदिर जरूर जाए। यह भारत का एक बहुत हि धार्मिक और पवित्र स्थल हैं। इस मंदिर को शक्तिपीठ भी कहा जाता हैं। इस मंदिर में माता रानी रजस्वला होती हैं। यह 52 शक्तिपीठों में से एक हैं। यह शक्तिपीठों में सबसे प्रसिद्ध मंदिर यही हैं। यह मंदिर 3 हिस्सो में बटा हुआ हैं। इस मंदिर में एक पत्थर भी हैं, जहा से खून धारा बहती हैं। 
जो एक दुर्लभ हैं। यहां हर किसी की कामना पूर्ण होती हैं। इसी कारण इस मंदिर को कामख्या माता का मंदिर कहा जाता हैं। यहां पर हर साल अंबुवाची मेला लगता है। इस मेले को दुनियां भर के लोग देखने आते हैं। मेले के दौरान पास में हि स्तिथ ब्रह्मपुत्र नदी का पानी 3 दिन के लिए लाल हो जाता हैं। असम के गुवाहाटी के पास में स्तिथ नीलांचल पर्वत पर स्तिथ है। यह कामख्या माता का मंदिर।


उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर :- 
श्री महाकालेश्वर भारत में बारह प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। यह मन्दिर मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में स्तिथ हैं। जो की भगवान शिव का मन्दिर हैं। यहां हार साल लाखों भक्तो को भीड़ लगी रहती हैं। यहां हार दिन सुबह भस्म आरती होती हैं। जो एक अद्भुत आरती हैं। यहां मुर्दे इंसान की भस्म से भगवान शंकर का श्रृंगार किया जाता हैं। इस आरती में जानें के लिए भक्तो को पहले से ही बुकिंग करनी पड़ती हैं। 
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के 3 भाग हैं।  
1. महाकालेश्वर
2. ओंकारेश्वर
3. नागचंद्रेश्वर 
नागचंद्रेश्वर के दर्शन साल में एक बार ही होते हैं। इनके दर्शन नागपंचमी के दिन हि होते हैं। महाकालेश्वर मंदिर बहुत हि प्रसिद्ध मन्दिर हैं। इन्हे उज्जैन के राजा कहते हैं।


माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू कश्मीर :- 
भारत के प्रमुख धार्मिक मन्दिर में से एक यह भी मन्दिर हैं।माता वैष्णो देवी जम्मू कश्मीर के कटरा शहर के त्रिकुट पर्वत पर स्थित है। माता वैष्णो देवी का मंदिर एक गुफा में स्तिथ है। यह भारत के उत्तर में स्तिथ बहुत हि पवित्र स्थल है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। यहां नवरात्री के दिनों अत्यधिक भीड़ लगी रहती हैं। इस मन्दिर की सुरक्षा भगवान शिव के अवतार हनुमान जी और भैरव बाबा करते हैं। 
माता वैष्णो देवी से पहले श्रद्धालु भैरव बाबा के दर्शन करते हैं। क्योंकि सबसे पहले यहां पर भैरव बाबा का मन्दिर आता हैं, जो की माता वैष्णो देवी मंदिर की सुरक्षा करते हैं। इनके दर्शन होने के बाद श्रद्धालु आगे की यात्रा आरंभ करते हैं। यहां शर्दियो के दिनों में अत्यधिक ठंड रहती हैं। चारो तरफ बदलो का घेरा छाया रहता हैं। मन्दिर के चारो तरफ हरे भरे पर्वत स्तिथ हैं। यहां पर जानें के लिए लिफ्ट की भी सुविधा हैं। जो की बुजुर्ग लोगो के लिए बनाई गई थीं। यह भारत की प्राचीन विरासत हैं। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना हैं। 

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